
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ कुलदीप सिंह द्वारा जनपद के समस्त निजी चिकित्सालयों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब एवं डायग्नोस्टिक सेंटरों को निर्देश जारी करते हुए डेंगू जांच की अधिकतम शुल्क दर निर्धारित कर दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन एवं महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में डेंगू जांच हेतु निजी चिकित्सालयों एवं पैथोलॉजी लैब में अधिकतम जांच शुल्क ₹600 निर्धारित किया गया है। शासन के निर्देशानुसार किसी भी निजी संस्था द्वारा निर्धारित दर से अधिक शुल्क वसूले जाने पर संबंधित संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निजी चिकित्सालय एवं जांच केंद्र निर्धारित दरों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करें तथा मरीजों को जांच शुल्क संबंधी जानकारी प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करें, जिससे आमजन को अनावश्यक आर्थिक भार का सामना न करना पड़े।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि जनहित में डेंगू की समयबद्ध जांच एवं उपचार अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में सभी संबंधित संस्थाएं शासन के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करें। निरीक्षण के दौरान यदि किसी संस्था द्वारा अधिक शुल्क वसूले जाने अथवा अनियमितता की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित के विरुद्ध विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि डेंगू से बचाव हेतु स्वच्छता बनाए रखें, जलभराव न होने दें तथा किसी भी प्रकार के बुखार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें।
[5/26, 20:44] +91 91407 60704: जिला चिकित्सालय मुरादाबाद में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक श्री प्रदीप कुमार वार्ष्णेय द्वारा प्रशिक्षु चिकित्सकों (इंटर्न) के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने ओपीडी में आने वाले मरीजों के प्रति संवेदनशील, विनम्र एवं सकारात्मक व्यवहार अपनाने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक का व्यवहार मरीज के उपचार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मरीजों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनना, उनके रोग को सही प्रकार से समझना तथा सहानुभूतिपूर्वक उचित चिकित्सा परामर्श एवं उपचार प्रदान करना प्रत्येक चिकित्सक का दायित्व है।
इस अवसर पर सभी प्रशिक्षु चिकित्सकों को निर्देशित किया गया कि वे मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ शिष्टाचारपूर्ण व्यवहार करें तथा अस्पताल आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने इंटर्न चिकित्सकों को चिकित्सा सेवा के दौरान मानवीय मूल्यों, सेवा भावना एवं चिकित्सकीय नैतिकता का पालन करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मरीजों का विश्वास ही चिकित्सक की सबसे बड़ी पूंजी है और गुणवत्तापूर्ण उपचार के साथ अच्छा व्यवहार भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षु चिकित्सकों ने मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा एवं सम्मानजनक व्यवहार उपलब्ध कराने का संकल्प लिया।

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